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________________ २१ ५२५ ] सणतुकुमारचरिउ [५२२] सुयणु बहुहिं वि वाम-नयणाहिं निय-सविहिहिं संठियहिं आसि विरसु मह अमय-पाणु वि । अइ-उण्हु चंदण-रसु वि तणुहु दाह-करु मलय-पवणु वि ॥ मुम्नुर-अग्गि-विसेसयर रयणीयर-किरणा वि । करवालाउ वि तिक्खयर मुत्ताहल-हारा वि ॥ . [५२३] एण्हि पुणु तुहु ति-जय-तिलयाए तणु-संगम-अमय-रस- पसर-सित्तु पुव्युत्तु सयलु वि । हउं मन्नउँ परम-सुह- हेउ सेस-तरुणियण-वियल्लु वि । ता पसयच्छि सिणिद्ध-निय- दिद्विण संभावेसु । मा तिल-तुस-तिभागिण वि महुवरि कोवु करेसु ।। [५२४]] तयणु मह सहि सुहय-नेवत्थ एस त्ति परिचितिरिय अकय-संक निय-अंकि ठाविवि । जहण-त्थल-धण-वयण- पाणि-फरिस-सुहु परमु पाविवि ॥ सव्वंगालिंगणु करिवि सायरु लोयणि वामि । कुमरिण चुंविय वाल निरु मयणुज्जीवण-धामि ॥ . [५२५] एत्थ-अंतरि जणय-पासाउ .. तुरंतउ पवर-नरु नाइदूर-देसम्मि पत्तउ । · जंपेइ य गुरु-हरिस- रोम-राइ-रेहंत-गत्तउ । सूर-नराहिब-नंदणह सविहि गहिर-सदेण । हउं पेसिउ चिहउं पुरउ कुमरह धरणिंदेण ॥ ५२३. १. तुह.
SR No.010685
Book TitleSantukumar Chariya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorH C Bhayani, Madhusudan Modi
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1974
Total Pages197
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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