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________________ १३२ ___ श्री जैन सिद्धान्त भवन ग्रन्थावली Shri Devakumar Jain Oriental Library Jain Siddhant Bhavan, Arrah ३६६. सामायिक Opening. I Closing : सिद्धश्चाप्ट गुणान्भक्त्या सिद्धान् प्रमणमत सदा । सिद्धकार्या. शिव प्राप्ता. सिद्धि ददतु नोहिते ॥ एव सामयिक सम्यक् सामायिकमखण्डितम् । __ वर्तता मुक्तिमानेन वसीभूतमिद मम ।। १२ ।। इति श्रीलघु भामायिक समाप्तम् । Colophon : ३६७. सामायिक Opening : सिद्धिवस्तुवचोभवत्या सिद्धान् प्रणमते सदा । सिद्धिकार्यासिवप्रेदा सिद्ध दधतु नोव्ययम् ॥ Closing : - भो मामायक मुक्ति वध के वसीभूत असे ___तुम्हारे अर्थ हमारा नमस्कार होहु । Colophon i इति सामायक सम्पूर्णम् । ३६८. सामायिक Opening i अर्हन्त भगवान की वाणी की भक्ति करि सदाकाल सिद्धभगवान कू नमस्कार करते । Closing : जलयी वाकी संख्या। वाजिक वजासुन वाकी संख्या। दशोदिशा की सख्या । Colophon इति सामायिक सम्पूर्णम् । ३६६. सामायिक वचनिका Opening: आदि रिपभ सनमति चरम, तीर्थंकर चउवीस । सिद्ध मुरि उवझाय मुनि, नमू धारिकरि शीश ।। ऐस सामायिक पठ्यो सारजानि मुनि वृद। धर्मराज मति अल्प फुनि भाषामय जयचद ।। Closing i
SR No.010506
Book TitleJain Siddhant Bhavan Granthavali Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhchand Jain
PublisherJain Siddhant Bhavan Aara
Publication Year1987
Total Pages531
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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