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________________ पना थोडे काल तक रहती है, वा जाव जीव कत भी॥ सेकिंतं दव्वावस्सयं २ दुविहा पणत्ता, तंजहा, आगमोय,नो आगमोय २ सेकिंतं, आगमउ, दव्वावस्सय२ जस्सणं आवस्सयति पयंसिरिक यं जावनो अणुप्पेहाए कम्हा अणुवउगो दब मिति कटु ॥ अस्यार्थः॥ प्रश्न-द्रव्य आवश्यक क्या । उत्तर-द्रव्य आवश्यक २ भेद यथा षष्ट अध्ययन आवश्यक सूत्र १ आवश्यक के पढ़ने वालाआदिर प्रश्न-आगम द्रव्य आवश्यक क्या । उत्तरआवश्यक सूत्रके पदादिकका यथाविधि सीखना पढ़ना परंतु विना उपयोग क्योंकि विना उपयोग द्रव्यही है । इति ।
SR No.010483
Book TitleSatyartha Chandrodaya Jain arthat Mithyatva Timir Nashak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorParvati Sati
PublisherLalameharchandra Lakshmandas Shravak
Publication Year
Total Pages229
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
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