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________________ ८०२ सूत्र ७ 9 सूत्र । शब्द - अध्याय __ सूत्र ४२ क्रिया ३३ कीलक संहनन कुप्यप्रमाणातिक्रम कुब्जक संस्थान कुल कुशील कूटलेख क्रिया केवलज्ञान ww x :9 orar our MCN MWCCMMMo० ." शब्द अध्याय एकत्ववितर्क है एवं भूननय एषणा समिति [ औ] औपशमिक सम्यक्त्व २ औपशमिक चारित्र २ [क] कर्म योग कर्मभूमि कल्पोपपन्न कल्पातीत कल्प कषाय कृत कन्दर्प कषायकुशील काल कार्मण शरीर काय योग कायिकी क्रिया कारित काय निसर्ग कारुण्य कांक्षा कामतीनाभिनिवेश फाययोगदुष्पणिधान " कालातिक्रम फायक्लेश काल फिल्विषक 200000 ur ur 9 horar ur ur 6 Mamak.sex केवल दर्शन केवलीका अवर्णवाद केवलज्ञानावरण केवलदर्शनावरण क्रोधप्रत्याख्यान कोडा कोडी ८ टिप्पणी कौतकुच्य ३२ [ ] क्षायिक भाव क्षयोपशम, क्षायोपशमिक भाव क्षयोपशम दानादि २ क्षायिकसम्यक्त्व क्षायिक चारित्र क्षायोपशमिक सम्यक्त्व चारित्र २ शान्ति क्षिण १६ सुधा परीषह जय 9 22:0 or arrrrur orware or 4000xx.ru r 0 क्षेत्र
SR No.010422
Book TitleMoksha Shastra arthat Tattvartha Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRam Manekchand Doshi, Parmeshthidas Jain
PublisherDigambar Jain Swadhyay Mandir Trust
Publication Year
Total Pages893
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Tattvartha Sutra, Tattvartha Sutra, & Tattvarth
File Size35 MB
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