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________________ मगलमन्त्र णमोकार एक अनुचिन्तन ७३ हुआ १०८ बार इस मन्त्रका जाप करे । कमलको आकृति निम्नप्रकार चिन्तन की जायेगी । मन्त्र जापका हेतु प्रतिदिन व्यक्ति १०८ प्रकारके पाप करता है, अत. १०८ बार मन्त्र का जाप करनेसे उस पापका नाश होता है । आरम्भ, समारम्भ, सरम्भ, इन तीनोको मन, वचन, काय से गुरणा किया तो ३x ३ = ९ हुआ । इनको कृत, कारित, अनुमोदित और कषायोंसे गुणा किया तो ९४ ३५४ = १०८ । वीचवाले गोलवृत्तमे १२ बिन्दु हैं और आठ दलो में से प्रत्येक मे वारह-बारह विन्दु हैं । इन १२४८ = ९६, ९६ + १२ = १०८ विन्दुओपर १०८ बार यह मन्त्र पढा जाता है । A हस्तांगुलिजाप - अपने हाथकी अँगुलियोपर जाप करनेकी प्रक्रिया यह है कि मध्यमा वीचकी अंगुली के बीच पोरुयेपर इस मन्त्रको पढ़े, फिर उसी अंगुली के ऊपरी पोरुयेपर, फिर तर्जनी - अँगूठे के पासवाली अंगुली के ऊपरी पोरुयेपर मन्त्र जाप करे । फिर उसी अँगुली के बीच पोरुयेपर मन्त्र पढ़े, फिर नीचे के पोरुयेपर जाप करे । अनन्तर वीचकी अंगुली के निचले पोरुयेपर मन्त्र पढ़े, फिर अनामिका - सबसे छोटी अँगुलीके सायवाली अंगुली के निचले पोरुयेपर, फिर वीच तथा ऊपर के पोरयेपर क्रमसे जाप करे । इसी प्रकार पुन. बीचको अंगुली के बीच के पोरुयेते जाप आरम्भ करे । इस प्रकार नौ-नी चार मन्त्र जपता रहे, इस तरह १२ बार जपनेमे १०८ बार मे पूरा एक जाप होता है ।
SR No.010421
Book TitleMangal Mantra Namokar Ek Anuchintan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1967
Total Pages251
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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