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________________ ९४ ] जैन तीर्थयात्रादर्शक | पड़ता है। किसीको उतरना हो तो उतर पड़े। यहां पर विद्ववर्य स्व० पं० गोपालदासजीका विद्यालय है, और मुनि अनंतकीर्तिमी महाराजका समाधि स्थान है । इसके स्पागे धौलपुर स्टेशन पड़ता है, यहांका पुल बड़ा नामी और कीमती है। देखनेकी इच्छा हो तो उतर पड़े । नहीं तो आगरा जाकर उतरना चाहिये । ( १५९ ) आगरा | इस शहर में कुछ ७ स्टेशन हैं। गाड़ी चारों तरफ जाती हैं । चाहे किमो स्टेशन उतरो परन्तु तांगावाले से किराया पहिले तय करलेना चाहिये | मोतीकटराकी धर्मशाला में उतरना चाहिये । यहां पर कुआ, बाजार, मंदिर आदि सब बानका सुभीता है । शहरमे २२ मंदिर हैं । सो किमी जानकार आदमीको साथ लेकर इन सब मंदिरोंका दर्शन करें। लौटते समय दर्शन करता चला आवे । नाई की मंडी में श्वेताम्बर मंदिरमें बहुत प्राचीन शीतलनाथकी प्रतिमा है । यहां पर ताजबीबीका रोजा, सिकन्दर मनजिद, लाल किला, तोपखाना, शीस महल, मच्छीभवन, पुल, जमना के घट, जुम्मामसजिद, दौलतका मकबरा, अजायबघर आदि देखने योग्य चीजें हैं। यहांसे फीरोजाबाद उतरे । आगराकी स्टेशनोंके नाम- १ आगरा फोर्ट, २ जंक्शन, ३ आगरा किला, ४ वेलनगंज आगरा, ५ नाईकी मंडी, ६ आगरा कैंट, ७ राजाकी मंडी | आगरा से १ 1 लाईन झांसी बंबई तक | बांदीकुई जालना, जयपुर, फुलेरा तक । अचनेरा मथुरा कानपुर; लुपलाईन, हंडला, कलकत्ता तक, देहली तक | आदि बहुत गाड़ी जाती हैं सो पूछकर इच्छानुसार चढा जावे । आगरा में ३०० वर्षोंमें कवि रूपचंद्रनी, भगवानदासजी, |
SR No.010324
Book TitleJain Tirth Yatra Darshak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGebilal Bramhachari, Guljarilal Bramhachari
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year
Total Pages273
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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