SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 233
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ श्रीगौतमप्टना अर्थसहित. २१ ॥ श्रीगौतमगुरुभ्यो नमः॥ अश्व ॥ संक्षिप्त बालावरोध सहिता श्रीगौतमटबा पारन्यते॥ प्रथम बालावबोधकर्ता मंगलाचरण करे . ॥ नत्वा वीरजिनं बाला, वबोधोलिख्यते मया ॥ श्रीमजौतमष्टबाया, वाचनार्थ विशेषतः ॥१॥ श्रीसोमसुंदर श्री, मुनिसुंदरमदिशालराजेंशः ॥ श्रीसोमदेवगुरवो, जयंति जिनकल्पवृदसमाः ॥ २॥ • हवे प्रथम ग्रंथकर्ता मंगलाचरण माटें गाथा कहे . ॥ नमिकण तिबनाहं, जाणंतो तहय गोयमो जयवं ॥ अबुहाण बोह 'गवं, धम्माधम्मं फलं वुले ॥१॥ जावार्थः-तीर्थना नाथ एवा श्रीम हावीर जगवालने नमस्कार करीने श्रुतकेवली एवा श्रीगौतमस्वामी पोतें चार झानना धणी श्रुतझानना बलें करी असंख्याता जव संबंधि संदेहने 'पोते जाणता बता पण अबोध जीवोने बोध थवाने अर्थे अडतालीश ट बायें करी पुण्य पापनुं फल श्रीमहावीर देवप्रत्ये पूबता हवा ॥१॥ हवे दश गांथायें करी अडतालीश टनानां नाम कहे जे. ॥ जयवं सच्चिय निरयं, सच्चिय जीवो पया पुरण सग्गं ॥ सच्चिय किं तिरिएसु, सच्चिय किं माणुसो दो ॥ २ ॥ सच्चिय जीवो पुरिसो,सच्चिय बी नपुंस हो ॥ अप्पाक दीहाक, होइ अनोगी सनोगी य ॥ ३ ॥ के व सुह जायज्ञ, केणव कम्मेण दूहन हो ॥ केशव मेहाजुत्तो, उम्मे हो कह नरो होइ॥ ४ ॥ कह पंमिनत्ति पुरिसो, केणव कम्मेण होइ मु स्कत्तं ॥ कह धीरु कह नीरू, कह विजा निप्फला सफला ॥ ५ ॥ केशव नास अबो, कह वा संमिला कह थिरो हो ॥ पुत्तो केण न जीव, बहु पुत्तो केण वा बहिरो ॥ ६॥ जचंधो केण नरो, केण विजुत्तं न जिय नरस्स ॥ केणव कुही कुजो, केशव कम्मेण दासत्तं ॥ ७ ॥ केण दरिदो पुरिसो, केणव कम्मेण इसरो हो ॥ केशव रोगी जायश, रोग विहूणो ह व केण ॥ ७ ॥ कह हीणंगो मूड, केणव कम्मेण ढूंट पंगू ॥ केशव रूवो जायs, रूव विद्वणो हवा केण ॥ ए॥ केशव बदुवेयपत्तो, केशव
SR No.010246
Book TitleJain Katha Ratna Kosh Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhimsinh Manek Shravak Mumbai
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1867
Total Pages321
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size37 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy