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________________ जैन धर्म का प्राचीन इतिहास-भाग २ भट्टवोसदि ३३६ भट्टाकलंकदेव ५४६ भट्टारकविद्यानन्दि ५१३ भट्टारक प्रभाचन्द्र ५२६ भट्टारक शुभचन्द्र ५२६ भ० श्रतकोति ५१४ भगवान महावीर २ भद्रवाहु श्रुतकेवली ४७ भद्रबाहु (द्वितीय)भरतसेन २३० भानुकीति सिद्धान्तदेव ४१६ भावसेन ३१६ भाबसेन विद्य ४०६ भास्कर कवि ५०१ भास्करनन्दी (तत्त्वार्थवृत्ति) ४५५ भूतबली ७१ भूपालकवि ३०१ (कवि) मंगराज ४४८ , मंगराज द्वितीय ४४४ , मंगराज तृतीय ४८५ मदनकीति ४०३ मधुरकवि ४४० मल्लिषेण २६६ मल्लिषेण पण्डित ४३१ मल्लिषेण मलधारि ३५७ महाबलकवि ४३० (पण्डित) महावीर ३६१ महावीराचार्य १८७ महासेन २६४ (प्राचार्य) महासेन २१४ महासेन (सुलोचना कथाकर्ता) १६७ महासेन पंडितदेव ३७४ (कवि) महिन्दु या महाचन्द्र ५२४ महेन्द्रदेव २१६ माइल्ल धवल ३३६ माघनन्दि योगीन्द्र ४४७ माघनन्दी सैद्धान्तिक ७१ माघनन्दि सिद्धान्तदेव ३४६ माण्डव्य (गणधर) २८ माणिक्य नन्दी २७७ माणिक्य नन्दी३४८ (कवि) माणिक्यराज ५१६ माणिक्यसेन पंडितदेव ३७४ माधवचन्द्र विद्य (क्षपणासार गद्य) ३६७ माधवचन्द्र विद्य ३२५ माधवचन्द्र मलधारी ३४६ माधवचन्द्र ३५० माधवचन्द्रवती ३५० माधवसेन २८७ माधवसेन नाम के अन्य विद्वान ३६० माधवसेन नाम के अन्य विद्वान ३६१ मानतुंगाचार्य १३३ मुनिचन्द्र ४१६ मुनिपूर्णभद्र ४१४ मेघचन्द्र ४२८ मेघचन्द्र विद्यदेव ३७० मेतार्य (गणधर) ५८ मौनिभट्टारक २२५ मौर्यपुत्र (गणधर) २८ (प्राचार्य) यति वृषभ १२३ यश: कीर्ति ४०२ (भ०) यशः कीर्ति ४८० यशोदेव २१८ यशोभद्र ११४ (पंडित) योगदेव ५०० (कवि) रइधू ४५६ रट्ट कवि अर्हद्दास ४२५ भ० रतनचन्द्र रत्न कीर्ति ५०० रत्न योगीन्द्र ४३६ (कवि) रन्न २१६ रवि कीर्ति २३६ रवि चन्द्र २७१ रविचन्द्र (आराधना समुचय) ४२४ रवि नन्दी १२७ रबिषेणाचार्य १५६ (कवि) राजमल्ल ५३३ (पंडित) रामचन्द्र ४६४ रामचन्द्र मुमुक्षु ३६८ मुनि रामसिंह (देहा पाहुड़) २४१ (ब्रह्म) राय मल्ल ५४३ रामसेन ३२३ राससेन २०७
SR No.010227
Book TitleJain Dharm ka Prachin Itihas Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorParmanand Jain
PublisherRameshchandra Jain Motarwale Delhi
Publication Year
Total Pages591
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size65 MB
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