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________________ ( २३ ) द्रव्य निश्चय से अप्रदेशी (एक प्रदेशी) है, व्यवहार से काल द्रव्य मे बहुप्रदेशी हो -- ऐसा नही है । प्रश्न १८ - अनेकान्त का द्रव्य-गुण- पर्याय क्या है ? उत्तर - आत्मा द्रव्य है, ज्ञान गुण है, अनेकान्त ज्ञानरूप पर्याय है | प्रश्न १६ - अनेकान्त का व्युत्पत्ति अर्थ क्या है ? उत्तर - अन् = नही, एक = एक, अन्त = धर्म, अर्थात् एक धर्म नही, दो धर्म हो यह अनेकान्त का व्युत्पत्ति अर्थ है । प्रश्न २० - अनेकान्त क्या बताता है ? उत्तर - दो धर्म हो, वे परस्पर विरुद्ध हो और वस्तु को सिद्ध करते हो, यह अनेकान्त बताता है । प्रश्न २१ - क्या नित्य- अनित्य आदि विरोधी धर्म हैं उत्तर - नित्य - अनित्य, एक-अनेक आदि विरोधी धर्म नही परन्तु विरोधी प्रतीत होने वाले धर्म है । वे परस्पर विरोधी प्रतीत होते है, है नही क्योकि उनकी सत्ता एक द्रव्य मे एक साथ पाई जाती है । प्रश्न २२ - वस्तु किसे कहते हैं ? उत्तर- (१) जिनमे गुण-पर्याय वसते हो उसे वस्तु कहते है । (२) जिसमे सामान्य-विशेपपना पाया जावे उसे वस्तु कहते हैं । (३) जो अपना-अपना प्रयोजनभूत कार्य करता हो उसे वस्तु कहते हैं । ? प्रश्न २३ - यह तीन वस्तु की व्याख्या किसमें पाई जाती है उत्तर - प्रत्येक द्रव्य में पाई जाती है । अत जाति अपेक्षा छह द्रव्य और सख्या अपेक्षा जीव अनन्त, पुद्गल अनन्तानन्त, धर्म-अधर्मआकाश एक-एक और लोकप्रमाण असंख्यात काल द्रव्य सब वस्तु हैं । प्रश्न २४ - वस्तु को जानने से हमे क्या लाभ रहा ? उत्तर---जब प्रत्येक द्रव्य वस्तु है, तो मै भी एक वस्तु हूँ | मैं अपने गुण- पर्यायो मे बसता हूँ, पर मे नही बसता हूँ । ऐसा जानकर अपनी
SR No.010119
Book TitleJain Siddhant Pravesh Ratnamala 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Mumukshu Mandal Dehradun
PublisherDigambar Jain Mumukshu Mandal
Publication Year
Total Pages289
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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