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________________ ( १२८ ) उत्तर--(१) आहारवर्गणा से मकान बना. तो पर्याय को माना। मैंने मकान बनाया, तो पर्याय को नहीं माना। प्रश्न (२४)-मैं जोर शोर से बोलता हूँ इसमें 'गुणों के कार्य को पर्याय कहते है', कब माना और कब नहीं माना ? उत्तर-भाषा वर्गणा से शब्द आया, तो पर्याय को माना और ___ मेरे से शब्द आया, तो पर्याय को नहीं माना। प्रश्न (२५)-मैंने बन्दूक में से गोली चलाई, इसमें 'गुणों के कार्य को पर्याय कहते हैं, कब माना, और कब नहीं माना ? उत्तर-बन्दूक की गोली प्रहारवर्गणा की क्रियावती शक्ति से गई, तो पर्याय को माना और मैंने गोली बन्दूक से चलाई, तो पर्याय को नहीं माना । प्रश्न (२६)-मैंने रोटी खोई, इसमें 'गुणों के कार्य को पर्याय __ कहते हैं' कब माना, और कब नहीं माना ? उत्तर-१) रोटी खाई यह पाहोर वर्गणा का कार्य है तो पर्याय को माना। (२) मैंने रोटी खाई, तो पर्याय को नहीं माना। प्रश्न (२७)-मैंने बिस्तरा बिछाया, इसमें गुणों के कार्य को पर्याय कहते हैं. कब माना और कब नहीं माना ? । उत्तर- बिस्तरा आहारवर्गणा की क्रियावती शक्ति से
SR No.010118
Book TitleJain Siddhant Pravesh Ratnamala 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Mumukshu Mandal Dehradun
PublisherDigambar Jain Mumukshu Mandal
Publication Year
Total Pages211
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
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