SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 182
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ०.५] गरीका देख १८१ २५५ शृंगेरी ( मैत्र) नक १०८२ = सन् १६०, कनड 3 MK ३ श्रीमन्परमगंमीरस्याबाहामोघलानं (1) • जीयात् त्रैलोक्यनाथस्य शासन जिनशासन (1) ३ स्वस्ति श्रीमत् मकवपद १०८० ४ विक्रमसवत्परत कुम्म शु५ द दशमि बृहबारनन्दु श्रीमन्निडगोड ६ विजयनारायण शान्तिसेट्टिय पुत्र वा७ मिट्टियर अक्क सिरियवाहियर म= गलु नागबेमेट्टियिर मगलु मिरिय९ लेमेटिनिग हेम्माडिमेटिगं सुपुत्रन१० प्प मारिसंहिग परोक्षविनयक मा११ डिसिट बसदिगे विट्ट दृत्ति केरेय केलग१२ ण हिरिय नदेय बमदिय बढगण होस१३ यु मडियु होलेयु नहुवण हुविन होरद १४ मण्णु कण्डग सुल्लिगोड अरुगण्डग मण्णु १५ वणजमु नानदेसियु बिट्टय १६ नलचेगे हाग हज हात्तिय मल 10 • 'ले मेटमिन मारक्क हागमु १८ मत् पोतोग्लुप्पु हेरिगयवत्तेले थरिसिनढ मलवेगे वीसक्क बिह नपिढडे तप्पिटवनु गगय१९ लुमाइर कविलेय कोण्ड पातक [ यह लेख पार्श्वनायमन्दिरके सभागृहमें है। इनकी तिथि शक
SR No.010009
Book TitleJain Shila Lekh Sangraha Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyadhar Johrapurkar
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages464
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & History
File Size10 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy