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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra प्रवचन- ३४ वैभव की समानता : www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ११८ यदि लड़की गरीब घर की है तो उसको श्रीमंत घर का पति कभी भी पसंद नहीं करना चाहिए। वैसे, लड़का यदि गरीब घर का है तो उसको पत्नी कभी भी श्रीमंत घर की पसंद नहीं करनी चाहिए । वर-कन्या में वैभव की असमानता तो घोर अशान्ति का निमित्त बनती है । श्रीमन्ताई के साथ अहंकार और तिरस्कार प्रायः जुड़े हुए ही होते हैं । श्रीमन्त परिवार में आयी हुई गरीब घर की लड़की का किस प्रकार अपमान और तिरस्कार होता है .... वह आप लोग क्या नहीं जानते? शायद ही कोई श्रीमन्त परिवार ऐसा गंभीर और समझदार होगा कि जहाँ गरीब माँ - बाप की बेटी को मान-सम्मान और प्यार मिलता हो । मान लो कि श्रीमन्त पति की ओर से, सास और ससुर की ओर से, देवर और ननद की ओर से सम्मान मिलता है, प्यार मिलता है, परन्तु मानवमन की विचित्रता है ! वह पुत्रवधू स्वयं हीन भावना से भर गई तो ? 'मैं तो गरीब घर की लड़की हूँ...ये सब श्रीमन्त हैं, जैसे मेरे प्रति दया भाव रखते हो वैसे मुझे देखते हैं।' अपनी गरीबी का खयाल मनुष्य को उदास कर देता है। कभी भूल से भी किसी ने उसके साथ घृणापूर्ण व्यवहार कर दिया तो उसके दिल को गहरी चोट पहुँचेगी। वैसे, श्रीमन्त घर की लड़की ने गरीब घर के अथवा मध्यम कक्षा के घर के लड़के से शादी की तो भी विषमता पैदा होगी। यदि लड़की में श्रीमन्ताई का अभिमान होगा तो ससुराल में सबके साथ अभद्र व्यवहार करेगी, सबको नीचा दिखाने की प्रवृत्ति करेगी, कभी अपने पति का भी अपमान कर बैठेगी। और इस दुर्व्यवहार से वह ससुराल में अप्रिय बन जायेगी। ससुराल में उसको किसी का प्रेम नहीं मिलेगा। पति के साथ उसका आन्तरिक प्रेम-संबंध नहीं रहेगा। झगड़ा करती रहेगी, अशान्ति पैदा करेगी। सभा में से : आजकल लड़कियों की शादी का प्रश्न तो अति विकट बन गया है। आप बताते हैं वैसे लड़के कहाँ खोजने जायँ ? ठीक ठीक पढ़े-लिखे और कमाकर खानेवाले लड़के भी २५-३० हजार से कम नहीं लेते! श्रीमन्त घर की लड़की के बाप को तो लाख-लाख रुपये देने पड़ते हैं। For Private And Personal Use Only महाराजश्री : लाख रुपये देने के बाद भी क्या वह लड़का अपनी पत्नी को, आपकी लड़की को सुखी ही करेगा, वैसा विश्वास कर सकते हो ? नहीं
SR No.009630
Book TitleDhammam Sarnam Pavajjami Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhadraguptasuri
PublisherMahavir Jain Aradhana Kendra Koba
Publication Year2010
Total Pages291
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, & Religion
File Size2 MB
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