SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 232
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org जस पंच कल्याणक, दिवस विशेष सुहावे; पण थावर नारक, तेहने पण सुख थावे. ते च्यवन जन्म व्रत, नाण अने निर्वाण; सवि जिनवर केरां, ए पांचे अहिठाण. जिहां पंच समिति युत, पंच महाव्रत सार; जेहमां परकाश्या, वली पांचे व्यवहार. परमेष्ठि अरिहंत, नाथ सर्वज्ञ ने पार; एह पंच पदे लह्यो, आगम अर्थ उदार. मातंग सिद्धाइ, देवी जिन-पद सेवी; दुःख दुरित उपद्रव, जे टाले नितमेवी. शासन सुखदायी, आइ सुणो अरदाश; श्री ज्ञान विमल गुण, पूरो वांछित आश.. यत्पाद-पद्म-युगलं प्रणमन्ति शक्रा, दुष्कर्म-वारण-विदारण-पंच-वक्त्रम्; Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir कल्याण मंदिर पादपूर्ति महावीर स्वामी स्तुति कल्याण-मन्दिर-मुदार-मवद्य-भेदि, क्षीणाष्ट-कर्म-निकरस्य नमोस्तु नित्यं, २ २२२ ३ ४ स्तोष्ये मुदा जिनवरं जिन-त्रैशलेयम्. . १ For Private And Personal Use Only भीताभय-प्रद-मनिन्दित-मंघ्रिपद्मम्;
SR No.008902
Book TitleJinandji Bhav Jal Par Utar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPadmaratnasagar
PublisherMahavir Jain Aradhana Kendra Koba
Publication Year2007
Total Pages292
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati & Worship
File Size7 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy