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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org ૮૨ ॥ अथ चेतन शक्ति ग्रन्थ ॥ छप्पय छंद. प्रणमुं श्री अरिहंत जिनेश्वर मंगलकारी, महिमा अपरंपार जगतमां जे उपकारी; ब्रह्मा विष्णु शिवशंकर महादेव विभु छो. शब्दातीत पण शब्द वाच्य जगमांहि प्रभुछो, परामां प्रतिभासता झट वैखरीथी वर्ण; भिन्नाभिन्न स्वपरूनुं हुं ज्ञान पामुं अभिनवं. अनेक भाषा शब्द नामथी तुं कहेवातो, पण नहि शब्द स्वरूप शब्दधी भिन्न पमातो; भाषा पुद्गल स्कंध तेहथी अरूप भासे. अचिन्त्य चेतन शक्ति चेतना सर्व प्रकाशे, शब्द संज्ञा ज्ञान हेतु छे श्रुत संज्ञा देवता; नमो बंभीलीवी भगवती योगीयो बहु सेवता. x Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir हंस गामिनी सरस्वती घट घटमां व्यापी, परापश्यंती ध्याने मनमां मुनिए थापी; अन्तरमा उद्योत सदा तेनाथी थावे, शब्द सृष्टितुं बीज योगीना मनमां भावे; आद्य शक्ति ब्रह्मनी छे जगत्मां जयजय करी, बुद्धिसागर बीज मंत्रे सरस्वती घटमां वरी. चेतननी शक्ति छे सरस्वति श्रुत वाणी, क्षयोपशमना भावे ज्ञाननी शक्ति जाणी; त्रण भुवन प्रख्यात सदा सुखसागर देती, 1 For Private And Personal Use Only ॥ १ ॥ ॥ २ ॥ ॥३॥
SR No.008538
Book TitleBhajanpad Sangraha Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBuddhisagar
PublisherAdhyatma Gyan Prasarak Mandal
Publication Year1909
Total Pages218
LanguageGujarati, Sanskrit
ClassificationBook_Gujarati & Worship
File Size11 MB
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