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________________ २१२ ए प्रमाणे गउ, कच्छु, विजु (विद्युत् ), उज्जु (ऋजु), पियंगु (प्रियङ्ग) माउ (मातृ) दुदु (द९) पड्डु (पटु), गुरु, लहु (लघु) अने कण्ड वगेरे उकारांत शब्दोनां रूपो ' घेणु' नी पेठे समजवानां छे. ܕܕ ܕܕ ܕܕ 'नई (नदी) प०- नई नईआ, नईउ, नईओ, नई बी०- नई नईआ, नईउ, नईओ, नई त०- नईअ, नईआ, नईहि, नईहिं, नईहि नईइ, नईए १ ईकारांत स्त्रीलिंगी शब्दना पालिरूपोः नदी १ नदी नदी, नदियो (नजो) नदिं, नदियं ३-५ नदिया ( नजा) नदीहि, नदीभि. ४-६ नदिया (नजा) नदीन ७ नदिया (नजा) (नज्ज) ८ सं० नदि नदी, नदियो (नज्जो) -~-जूओ पालिप्र० पृ० १०३-१०४-१०५-१०६ तथा एनां टिप्पणो. [सं० नद्यः, नद्या, नद्याः अने नद्याम् उपरथी पालिमा उपर्युक्त नज्जो, नज्जा, नज्जा अने नजं रूपो वनेला छे-जुओ पृ. ३३ अं० २७ –य, य्य, यज ] नदीसु,
SR No.008425
Book TitlePrakrit Vyakarana
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBechardas Doshi
PublisherGujarat Puratattva Mandir Ahmedabad
Publication Year1925
Total Pages456
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari & Grammar
File Size5 MB
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