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________________ आगम (४०) आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्तिः) भाग-४ अध्ययनं [१], नियुक्ति: [९४९-९५१], विभा गाथा , भाष्यं [१५१...], मूलं - /गाथा-], मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०], मूलसूत्र-[१] “आवश्यक" नियुक्ति एवं मलयगिरिसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सत्राक दीप अनुक्रम [१] श्रीआव-16 सो तं सोऊण संविग्गो-अलं संसारववहारेण, अहं तीसे करण किलेसमणुभवामि, एसा पुण एवंविहत्ति पबइतो । इयराणिहापारिणामिश्यकमल- तं चेव नगरं गयाणि जत्थ सो दारगो राया जातो, साहूवि विहरतो तत्थेव गतो, पविट्ठो कहमवि तीए घरे मिक्खानिमित्तं, क्याः उदायगिरीय- तीय भिक्खाए समं सुवण्णं दिन्नं, कूवियं-एसो समणो सुवणं गहाय गतो, गहितो य रायपुरिसेहि, दिट्ट मिक्खमज्ञ हरणानि वृत्तौ नम- सुवणं, रण्णो निवेइयं, रायाए भणियं-सूलाए पोइजउ, धावीए नातो, रणो कहियं-एस ते पिया, राया ससंभमं उछिऊण स्कारे पाएसु पडितो, ताणि निविसयाणि आणत्ताणि, पिया भोगेहिं रन्ना निमंतितो, नेच्छइ, राया सड्डो कतो। वरिसारत्ते पुण्णे 18वचंतस्स अकिरियानिमित्तं घिजाइएहिं दुअक्खरिया भद्दपरिधाइयारूबधारिणी उवट्ठिया, गुषिणी सा, राया अणुचयइ.15 ॥५२८॥ तीए गहितो-मम चिंतं करेह, ततो मा पवयणस्स उड्डाहो होउत्ति चिंतिऊण कटुसाहू भणइ-जइ मम एस गम्भो तो जोणीए शानीउ, अह न मम तो पोट्ट भिंदित्ता णीउ, एवं भणिए भिन्नं पोट्ट, पवयणस्स वण्णो जातो, कट्ठसेविस्स पारिणामिया बुद्धी, जीए वा पबावितोत्ति ॥ कुमारोत्ति खुडुगकुमारो, सो उपरि जोगसंगहे भणिहिइ । तस्स पारिणामिया बुद्धी २॥ दादेवीवि पुष्फभद्दे नगरे पुप्फसेणो राया, पुप्फवती देवी, तीसे दो पुत्तभंडाणि-पुप्फचूलो पुष्फचूला य, ताणि अणुरत्ताणि, |रण्णा दोऽवि परोपरं परिणावियाणि, भोगे भुंजंति, देवी निबेएण पबइया, देवलोगे देवो उववन्नो, सो चिंतेइ-जइ एयाणि - एवं रमंति ता नरगतिरिएसु उववञ्जिहिंति, सुविणए सो तेर्सि नरगे दंसेइ, सा भीया, पुच्छइ-पभाए पासंडिए, ते न ॥२८॥ याणंति, अन्नियापुत्ता आयरिया, ते सद्दाविया, ते सुत्तं कहृति, सा भणइ-किं तुम्भेहिवि सुमिणगो दिट्ठो, सो भणइ-16 आगमे अम्हे परिसं दिहुँ, पुणोऽवि देवलोगे दरिसेइ, तेवि से अन्नियापुत्तेहिं कहिया, ततो भणइ-कहं एरिसा देवलोगा? ~178~
SR No.007204
Book TitleAagam 40 Aavashyak Malaygiri Vrutti Mool Sootra 1 Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2017
Total Pages327
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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