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________________ मुज सिवाय ष्टप् ओली अशुद्ध शुद्ध पृष्ट आली अशुद्ध शुद्ध ७७ नाट दय | दहा १३९.१६ इत्न | इतना ८५.१२ तज्ञान प्रतिज्ञान , २१ पये पाये ,, १७ बच्चरकं पच्चकावं १४०१२ तमश तामश प्रति ११११९ सुजे ८८१० पातल पाताल १४३ ६ मंत्र | मंत्रि ८९ ७सिनाय १४४ २ कुब्ज कब्ज ९१ २ कापू कापूत १४५१२ वक वक्त ९२२० अपज्ञा अपक्षा १४७२० लवेगे लेयेंगे ९७११ अशुवि अशुची १४८ २ असुरत्र | असुरत्त ९९/११४७३ | ३४३ १५०११ भोग भोगवने , १८ बचार बेचारे १.३ १२,स्परझेंद्री स्पश्यन्द्री १५१ ७ आपय | अपाय । ० ११३/१९ पुस्तक पुस्तक ८ उपद्रब उपद्रव १५४ ९ नामवे नमावे २०९ नाटे माहे मोह , २ मुख मुखसे ३५ सत्य (सा- सच्चा भी नही१५६, ७ हिंश हिंशा . चाभी नहीं, झुटाभी नहीं)१५७ नोट भवती भक्ती झुटाभा नहीं) पूमत्य भाण १५८ ५ आपमें आपसमें १२३ ११ पक | पक्का १५९ ४ सम्य सम्प १२७१सविस्तर सविस्तार १६० । निदा निन्दा अङ्गा , ५ दनि १३.११ कलंद कलेश १६२ १८ और ,, ११पर्षादा प्रषदा १६४ बहुत जगह १३५/ ५/गति गति रूप ४ उत्तरका अक्ष | वह र नहीं है. १३६२ - दो शब्दो १६५, ७ जुमलीवा जुगलीया १३८ २ लीजो लीजाय १६६ ५ (मिथ्य | (मिथ्या) ,, ११ मोहके माह के तर्फ १६८ ५ मूलता मूलका १३९ ६ स्थपन्न स्थापन १६९/ ४ देवो देव
SR No.006299
Book TitleDhyan Kalptaru
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherKundanmal Ghummarmal Seth
Publication Year
Total Pages388
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size26 MB
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