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________________ णिसीहसुत्तं उ० 5 957 भिक्खू सचित्तरुक्खमूलंसि ठिच्चा सज्झायं अणुजाणइ अणुजाणतं वा साइज्जइ // 8 // जे भिक्खू सचित्तरुक्खमूलंसि ठिच्चा सज्झायं वाएइ वाएंतं वा साइजइ // 9 // जे भिक्खू सचित्तरक्खमूलंसि ठिच्चा सज्झायं पडिइ पडिच्छंत वा साइज्जह // 10 // जे भिक्खू सचित्तरुक्खमूलंसि ठिच्चा सज्झायं परियट्टेइ परियट्टेतं वा साइजह // 11 // जे भिक्खू अप्पणो संघाडि अण्णउत्थिएण वा गारथिएण बा सागारिएण वा सिव्वावेइ सिव्वावेतं वा साइज्जइ // 12 // जे भिवखू अप्पणो संघाडीए दीहसुत्ताई करेइ करेंतं वा साइज्जह // 13 // जे मिक्खू पिउमंदपलासयं वा पडोलपलासयं वा बिलपलासयं वा सीओदगवियडेण वा उसिणोदगवियडेण वा संफाणिय 2 आहारेइ आहारेंतं वा साइज्जह // 14 // जे भिक्खू पाडिहारियं पायपुंछणं माइत्ता तमेव रयणिं पञ्चप्पिणिस्सामित्ति सुए पञ्चप्पिणइ पञ्चप्पिणतं वा साइज्मइ // 15 // जे भिक्खू पाडिहारियं पायपुंछण जाइत्ता सुए पचप्पिणिस्सामित्ति तमेव रयणिं पच्चप्पिणइ पच्चप्पिणतं वा साइज्जइ // 16 // जे भिक्खू सागारियसंतियं पायपुंटणं जाइत्ता तमेव रयाणिं पञ्चप्पिणिस्सामित्ति सुए पच्चप्पिणइ पच्चप्पिगंतं वा साइज्जइ / / 17 // जे भिक्खू सागारियसंतियं पायपुंछणं जाइत्ता सुए पच्चप्पिणिस्सामित्ति तमेव रयणिं पच्चप्पिणइ पच्चप्पिणतं वा साइज्जह // 18 // जे. भिवखू पाडिहारियं दंडयं वा लट्ठियं वा अवलेहणियं वा वेणुसूई वा जाइत्ता तमेव रयणि पचप्पिणिस्सामित्ति सुए पच्चप्पिणइ पच्चप्पिणतं वा साइज्जइ // 19 // जे भिक्ख पाडिहारियं दंडयं वा लट्ठियं वा अवलेहणियं वा वेणुसूई वा जाइत्ता सुए पच्चप्पिणिसामित्ति तमेव रयणि पच्चप्पिणइ पचप्पिणतं वा साइजद्द // 20 // जे भिक्खू सागारियसंतियं दंडयं वा लट्ठिय वा अवलेहणियं वा वेणुसूइंवा जाइत्ता तमेव रयणिं पच्चप्पिणिस्सामित्ति सुए पञ्चप्पिणइ पञ्चप्पिणंतं वा साइज्जइ॥२१॥ जे भिक्खू सागारियसंतियं दंडयं वा लट्ठियं वा अवलेहणियं वा वेणुसूई वा जाइत्ता सुए पच्चप्पिणिस्सामित्ति तमेव रयणि पञ्चप्पिणइ पञ्चप्पिणंतं वा साइजइ // 22 // जे भिक्खू पाडिहारियं वा सेजासंथारयं पच्चप्पिणित्ता दोच्चं पि अण्णुण्णविय भहिलेइ भहिटुंतं वा साइबइ // 23 // जे भिक्खू सागारियसंतियं वा सेजासंथारयं पञ्चप्पिणित्ता दोच्चंपि अणणुण्णविय अहिढेइ अहिडेतं वा साइजइ // 24 // जे भिक्खू सणकप्पासाओ वा उण्णकप्पासाओ वा पोण्डकप्पासाओ वा अमिलकप्पासाओ वा दहसुत्ताई करेइ करेंतं वा साइजह // 25 // जे भिक्खू सचित्ताई दारुदंडाणि वा वेणुदंडाणि वा वेत्तदंडाणि वा करेइ
SR No.004389
Book TitleAnangpavittha Suttani Bio Suyakhandho
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1984
Total Pages746
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_jambudwipapragnapti, agam_jambudwipapragnapti, agam_nirayavalika, agam_kalpavatansika, agam_pushpika, agam_pushpachulika, agam_vrushnidasha, & agam
File Size13 MB
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