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________________ श्रीजीवाजीवाभिगम-सूत्रम् / प्रतिपत्ति 2 ] [ 217 गोयमा ! सव्वत्थोवा मणुस्सणपुंसका नेरइयनपुंसगा असंखेजगुणा तिरिक्खजोणिय-णपुसका अणंतगुणा 1 / एतेसि णं भंते ! रयणप्पहापुढवि-णेरइयणपुंसकाणं जाव अहेसत्तमपुढविणेरइयणपुंसकाण य कयरे 2 हिंतो जाव विसेसाहिया वा ?, गोयमा ! सव्वत्थोवा आहेसत्तमपुढवि-ओरइयणपुसका छ?पुढवि णेरड्यणपुसका असंखेजगुणा जाव दोच्चपुढवि-णेरइयणपुंसका असंखेजगुणा इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए णेरइयणपुसका थसंखेजगुणा 2 / एतेसि णं भंते ! तिरिक्खजोणिय-णपुंसकाणं एगिदियतिरिक्खजोणियं-णपुसकाणं पुढविकाइय जाव वणस्सतिकाइय-एगिदियतिरिक्खजोणियणपुसकाणं बेइंदिय-तेइंदिय-चउरिदिय-पंचेंदिय-तिरिवखजो. णिय-गापुसकाणं जलयराणं थलयराणं खहयराण य कतरे हितो जाव विसेसाहिया वा ?, गोयमा ! सव्वत्थोवा खहयर-तिरिक्खजोणिय-णपुंसका, थलयर-तिरिक्खजोणिय-नपुसका संखेजगुणा जलयरतिरिक्खजोणियनपुसका संखेजगुणा चतुरिंदियतिरिवखजोणिय-णापुसका विसेसाहिया तेइंदियतिरिक्खजोणिय-णपुसका विसेसाहिया बेइंदियतिरिक्खजोणिय-णपुसका विसेसाहिया तेउकाइप-एगिदियतिरिक्खा असंखेजगुणा पुढविकाइय-एगिदियतिरिक्खजोणिया विसेसाहिया, एवं ग्राउवाउ-वणस्सतिकाइय-एगिदियतिरिक्खजोणियणपुंसका अणंतगुणा 3 / एतेसि णं भंते ! मणुस्सणपुंसकाणं कम्मभूमिणपुसकाणं अकम्मभूमिणपुसकाणं अंतरदीवकाण य कतरे कयरेहितो अप्पा वा 4 ?, गोयमा ! सव्वत्थोवा अंतरदीवग-अकम्मभूमग-मणुस्तणपुंसका देवकुरु उत्तरकुरु-अकम्मभूमगा दोवि संखेजगुणा एवं जाब पुब्वविदेह-अवरविदेहकम्मभूमगा दोवि संखेजगुणा 4 / एतेसि णं भंते ! णेरइयणपुसकाणं रयणप्पभापुढवि-नेरइय-नपुसकाणं जाव अधेसत्तमायुढविनेरइय-णपुंसकाणं तिरिक्खजोणियणपुसकाणं एगिदिय-तिरिवखजोणियाणं पुढविकाइय-एगिदिय-तिरिक्खजोणियणपुंसकाणं जाव वणस्सतिकाइय 28
SR No.004366
Book TitleAgam Sudha Sindhu Part 05
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinendravijay Gani
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year1977
Total Pages456
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_aupapatik, agam_rajprashniya, & agam_jivajivabhigam
File Size11 MB
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