________________ (8) वैद्यवल्लभ / कृतः कषायो मधुना विमिश्रः . सर्वज्वरं शान्तिमयं नयेच्च // 24 // भाषाटीका॥ गिलोय, सोंठ, नीमकी छाल, अडूसो, कुटकी, हरड, पोहकरमूल, भांगरा, धमासा, ये सब बराबर भाग ले क्वाथकर सहवके संग पोवे सो सब वरहके ज्वर दूर होय // 24 // अथ ज्वरारिरसः॥ गंधकं स्वर्णबीजानि तालनागरसोषणैः // मनःशिलाच कारेलीरसेन गुटिका कृता // 25 // शृंगवेररसेनैका दत्ता सर्वज्वरापहा // आध्मानंस्यति मंदाग्निकफव्याधिविनाशिनी 26 इति श्रीवैद्यवल्लभेहस्तिरुचिकविरचिते सर्वज्वरप्रतीकार निरूपणो नाम प्रथमो विलासः // 1 // भाषाटीका // गंधक, धतूरेके बीज, हरताल, वेलिया, मीठी, पारौ, मिर्च, स्याह, मनशील, ये सब बराबर भाग ले एकत्रकर करेलाके रसमें गोली बांधे // 25 // ये गोली एक अदरखके रससा देनी वो सब ज्वरनको दूर कर और अफारा अति मंदामि कफकी बीमारीनको नाश करै // 26 // इतिश्रीवैद्यवल्लभे मथुरास्थदक्षगोत्रोद्भवचातुर्वेदिशर्मा राधाचंद्रकतव्रजभाषाटीकायां सर्वज्वरप्रवीकारनिरू पणो नाम प्रथमो विलासः // 1 //