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________________ ___ इस प्रकार ये तीन नियम आवश्यक हैं। ऐसा होने पर भी किसी के साथ ‘डायरेक्ट लाईन' में, फोन में बातचीत हो सकती हैं। यह दैनन्दिन अनुभव की बात है। इन्ही तीनों सिद्धांतो को णमोक्कार मंत्र के साथ जोड़ कर अरिहंत परमात्मा के साथ डायरेक्ट बातचीत कर सकते है - पहला नियम १. णमोक्कार महामंत्र में जिनके साथ हमें संपर्क साधना है, वे अरिहंत प्रभु है। उनके साथ संपर्क जोड़ने के लिये पहला नियम यह है कि जिस प्रकार टेलिफोन द्वारा किसी दूरवर्ती व्यक्ति के साथ बातचीत करनेवाला व्यक्ति स्थानीय लाईन को स्थगित कर देता है, उसी प्रकार वीतराग प्रभु के साथ संपर्क जोड़ने की भावना रखनेवाले व्यक्ति के लिये यह आवश्यक है कि वह लौकिक संबंधियों से तथा भौतिक वस्तु-संबंधी विचारों का त्याग करे। वैसा किये बिना वह परमात्मभाव के साथ जुड़ नहीं सकता। इसका अभिप्राय यह है कि - बहिरात्मभाव से छूटना ‘लोकल लाईन' का disconnection है। २. दूसरा नियम है - कोड़ नंबर का डायलिंग। ‘णमो' पद परमात्मा का कोड़ नंबर है। जिस तरह दूर के व्यक्ति के साथ टेलिफोन पर संपर्क करने हेतु उस स्थान के कोड़ नंबर को डायल करना पड़ता है, उसी प्रकार ‘णमो' पद का उच्चारण परमात्मा के डायलिंग का कोड़ नंबर है। अर्थात् ‘णमो' शब्द बोलते ही साधक परमात्मा-भाव की परिधि में आ जाता है। ‘णमो' पद विभाव-दशा में से स्वभाव दशा में जाने के लिये ‘टर्निंग पोईंट' है। ‘णमो' पद अंतरात्मा भाव रूप है। ३. तिसरा नियम है - जिससे बातचीत तथा संपर्क करना है, उसके नंबर का डायल करना या साधक को परमात्मा के साथ अपना संपर्क जोड़ना है, परमात्मा के नंबर का डायलिंग करना है परमात्मा के साथ डायरेक्ट बातचीत करने का नंबर यह है - ७५७७९ । परमात्मा का नंबर ‘अरिहंताणं' पद है। इस पद का अर्थ परमात्म भाव में स्थिर होना है। इस प्रकार ‘णमो अरिहंताणं' पद द्वारा साधक परमात्मा के साथ डायरेक्ट लाईन द्वारा जुड़ सकता है। टेलीफोन में वार्तालाप करते समय कभी-कभी ‘डायरेक्ट-लाईन' एंगेज भी आती है, परंतु परमात्मा की डायरेक्ट लाईन कभी भी व्यस्त (engaged) नहीं होती। टेलीफोन में बिना किसी रूकावट के सीधी बात हो सकती है, इसे हॉट लाईन (hot line) कह सकते है। ___णमो अरिहंताणं' पद परमात्मा के साथ सीधा संपर्क साधने की दिव्य कला या हॉट लाईन है। (२९१)
SR No.002297
Book TitleJain Dharm ke Navkar Mantra me Namo Loe Savva Sahunam Is Pad ka Samikshatmak Samalochan Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorCharitrasheelashreeji
PublisherSanskrit Bhasha Vibhag
Publication Year2006
Total Pages350
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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