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________________ विषय क्रम १०३ १०४ १०५ ११० ११२ - प्राचार्यपद का पाराधन - प्राचार्यपद का पाराधक - प्राचार्यपद की भावना (४) श्री उपाध्याय पद - श्री उपाध्याय पद की पहिचान - अनेक उपमानों से समलंकृत - 'उपाध्याय' शब्द की व्याख्या, व्युत्पत्ति और अर्थ - उपाध्याय के अन्य नाम - उपाध्याय के पच्चीस गुण - उपाध्याय पद की आराधना नील वर्ण से क्यों - उपाध्याय पद का अाराधन - उपाध्याय पद का पागधक - उपाध्याय पद की भावना (५) श्री साधुपद (मुनिपद) - श्री साधुपद की पहिचान - साधुपद का पाराधन सत्ताईस प्रकार से क्यों - पंचपरमेष्ठी में साधुपद का स्थान --- साधुपद की आराधना श्यामवर्ण से क्यों ... - साधु शब्द की व्याख्या, व्यु पत्ति और अर्थ ... - अनेक उपमाओं से समलकृत साधु-श्रमण । - पंचपरमेष्ठी में मूलपद कौन सा है - साधु के अन्य नाम - साधु के अनेक भेद - श्रीसाधुपद का नमस्कारात्मक वर्णन - मंगलरूप साधुमहाराज ११३ ११५ ११६ १२० १२३ १२८ १२९ ( १६ )
SR No.002288
Book TitleSiddhachakra Navpad Swarup Darshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSushilsuri
PublisherSushilsuri Jain Gyanmandir
Publication Year1985
Total Pages510
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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