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________________ प्रस्तुत प्रकाशन के अर्थ सहयोगी स्व० श्री फतहलाल जी सा० हिंगर- उदयपुर : एक परिचय प्रस्तुत ग्रन्थ के प्रकाशन में स्व० श्रीमान् फतहलाल जी सा० हिंगर की पुण्य स्मृति में उनके पारिवारिक जनों ने अर्थ सहयोग प्रदान किया है । स्व० फतहलाल जी सा० हिंगर का जन्म सन् १९१९ कार्तिक शुक्ला ६ को उदयपुर नगर में हुआ, उनके पिताजी का नाम लक्ष्मीलाल जी एवं माताजी का नाम देवकु वर था । आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातकीय उपाधि तकनीकी शिक्षा औद्योगिक रसायन एवं रासयनिक इंजिनियरिंग विषय लेकर प्राप्त की । आप कई भाषाएँ जानते थे एवं भारत के स्वतन्त्रता आंदोलन में भी आपने सक्रिय भूमिका निभाई थी । हैदराबाद, सिंघ, पोरबंदर, भावनगर, अहमदाबाद में कार्य करने के बाद आप उदयपुर में आयुर्वेद सेवाश्रम के उपमहाप्रबन्धक के पद पर २६ वर्ष रहने के पश्चात् सेवा निवृत्त हुए । आप एवं आपका परिवार धार्मिक संस्कारों से ओतप्रोत रहा है । आपने साधुमार्गी संघ के कई आचार्यों की निकट से सेवा का लाभ लिया था । आपके परिवार से आपकी दादीजी एवं भूवाजी ने भागवती दीक्षाएँ अंगीकार की हैं । आप उदयपुर साधुमार्गी जैन संघ के प्रथम मन्त्री चुने गये और बाद में अध्यक्ष पद पर भी कार्य किया था । श्री गणेश जैन छात्रावास की स्थापना Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001140
Book TitleAgam 26 Prakirnak 03 Maha Pratyakhyan Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPunyavijay, Suresh Sisodiya, Sagarmal Jain
PublisherAgam Ahimsa Samta Evam Prakrit Samsthan
Publication Year1991
Total Pages115
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_mahapratyakhyan
File Size6 MB
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